ज्ख्मो को भरने मे अरसा तो लगा ,
मगर फिर भी एक नयी चोट की आस थी,
आँसू बहे, आँखे गहराई
पॅल्को को अब भी किसी बारिश की प्यास थी,
हर वक़्त गुज़ारा डॉवा पूछते ,
फिर भी इस दिल को
एक मीठे से दर्द की तलाश थी ....
अंतरात्मा का द्वंद शांत नहीं होता। स्थिरता और ठहराव में शायद ज़मीन आसमान का अंतर होता है।जीवन स्थिर हो भी जाए तो , च...
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