Thursday, May 16, 2019

Aabhas

अंतरात्मा  का द्वंद शांत नहीं होता।स्थिरता और ठहराव में शायद ज़मीन आसमान काअंतर होता है।जीवन स्थिर हो भी जाए तो,चित में ठहराव आजाए... ऐसा हमेशा संभव नहीं है।

क्या किसी का चित् भी शांत हुआ है?  कौन पकड़ पाया है अपने मन को? 
बड़े महारथी लगे, साधु संन्यासी लगे, जीवनदर जीवन, ध्यान, योग, मुद्रा और   कड़ा अनुशासन तब जाकर कहीं योगी मन को साध पाते हैं। 

फिर मैं भी क्या? बस एक चंचल मन..... कभी यहाँ कभी वहाँ। 

Khidki

  1. इसशीतलहरमेंदुशालाओढ़ें, सुबहसुबहसारेदरवाज़ेखोलकरबैठीहूँखिड़कीसेबाहिरदेखतीहुई, अशोककेलम्बेपेड़झूमरहेहैंइनहल्कीहवाओंमें।एकखिड़कीकेशीशेकेझरोखोंसे, परदोंकीओटसेदेखतीहैदुनिया, कभीलगतीहैकितनीअपनीसी, औरकभीअपनायीसी! 

Green cover

तुमशहरबसातेरहतेहो, येजंगलमैंनेबोयाहै।

सिर्फ़एकआत्मविश्वासपर, भविष्यउज्जवलहोगा, स्वस्थहोगा, समृद्धहोगा; येआम, कटहल, महुए, आवले, नींबू, अनार, औरसागवानहज़ार, कुछखरगोश, कच्छुऐ, मछली, कुछगाय, बकरी, घोड़े, कुत्ते, बंदर, ओैरहिरण..... ऊबड़ख़ाबड़धरतीथी,जिसमेंमैंनेकुछहरारंग, कुछजड़औरजीवन, पिरोयाहै।

गांवोंकोपानीमिलजाए,औरराहगीरोंकोपेड़कीछांव, एककोनेमेंकुएँखुदवाया, एकछोटेमंदिरमेंशिवपरिवारसमाया. 

संसारकाकारोबारतोचलताहीरहेगा,मैंनेप्रकृतिकोदोदशकोंमेसंजोयाहै।

Rumblings

मेरेफ़सानेकाकोईहिस्साबदलजाताहै, जिसशहरसेगुज़रताहु,मेराक़िस्साबदलजाताहै! 

वोकहतेहैलोगोंकोशहरबदलदेतेहै, वोहमसेनहींमिलेजोशहरबदलदेतेहै। 

Aabhas

अंतरात्मा     का  द्वंद  शांत  नहीं  होता। स्थिरता  और  ठहराव  में  शायद  ज़मीन  आसमान  का अंतर  होता  है।जीवन  स्थिर  हो  भी  जाए  तो , च...