- इसशीतलहरमेंदुशालाओढ़ें, सुबहसुबहसारेदरवाज़ेखोलकरबैठीहूँखिड़कीसेबाहिरदेखतीहुई, अशोककेलम्बेपेड़झूमरहेहैंइनहल्कीहवाओंमें।एकखिड़कीकेशीशेकेझरोखोंसे, परदोंकीओटसेदेखतीहैदुनिया, कभीलगतीहैकितनीअपनीसी, औरकभीअपनायीसी!
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Aabhas
अंतरात्मा का द्वंद शांत नहीं होता। स्थिरता और ठहराव में शायद ज़मीन आसमान का अंतर होता है।जीवन स्थिर हो भी जाए तो , च...
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खुली आखो से जो देख रही हूँ .... सपनो जैसी वो हक़ीकत ही तो है ... इन पलको पर जो दमका करती है .. वो चमक तेरी बेपन्ह मोहोबबत ही तो है .. मुस्...
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दिल और दिमाग़ की जंग बड़ी अजीब होती है .... खायालो और ख्वाबो की दुनिया मे भी कोई नेया कोई मजबूरी होती है .... जो सोच समझ कर की जाए .. वो ग...
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महन्दी की महक , सजे हुए नाज़ुक हाथ चूड़ियाँ और खनकती पायल .... कुछ चीज़ो का मतलब शायद मोहोब्बत ही समभजाती है ... सपनो मैं मुस्कुराना , कभी...
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