दुनिया देखी , जहान देखा
परिन्दो की तारहा भटकते हुए ,
रोज़ नयी ज़मीन नया आसमान देखा ,
देखा ओ बहुत कुछ यंहा मगर ,
हँसते खेलते .सोचते समझते
हर पल तुम मे हम ने एक नया इंसान देखा !
अंतरात्मा का द्वंद शांत नहीं होता। स्थिरता और ठहराव में शायद ज़मीन आसमान का अंतर होता है।जीवन स्थिर हो भी जाए तो , च...
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