जब दिल रोए और आँख साथ ना दे,
जब होत तड़ापे और बोल ना फूटे,
ऐसा वक़्त तू किसी को उधार ना देना ,
किसी ज़िंदगी मे सुख के बाद रंज का पहाड़ ना देना ,
प्यासी धरती को सूखे की मार ना देना ,
तू दाता है, सब देता है ... अब किसी को प्यार ना देना !
अंतरात्मा का द्वंद शांत नहीं होता। स्थिरता और ठहराव में शायद ज़मीन आसमान का अंतर होता है।जीवन स्थिर हो भी जाए तो , च...
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