मैं आग हूँ हवा हूँ ,
प्र्थवि , आकाश ,धारा हूँ ....
मैं स्वयं ब्रहम तो नही शायद ...
पर पाँच तत्वो से बना हूँ ..
कोई उर्जा मुझे संचालित करती है
कोई शक्ति नयी सुबहा दिखाती है
स्पंदन हृदय का ध्वनि नाद सा,
चक्शु बंद हो ब्रहमंड घुमाती है ...
सर्वस्व समाया रखा है कान्ही इस काया मे,
देव और पिशाच हूँ ,
माया मोक्ष मैं झूलता हुआ ...
मैं एक अमर प्राण निर्विनाश हूँ !!!
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